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बैंक खाते बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार

देहरादून। एसटीएफ और साइबर क्राइम थाना पुलिस ने साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी आम लोगों के नाम पर बैंक खाते खोलकर उन्हें साइबर अपराधियों को बेचते थे, जिनके जरिए देशभर में लाखों रुपये की ठगी की रकम का लेनदेन किया गया।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि एएसपी कुश मिश्रा के नेतृत्व में शनिवार को हरिद्वार में कार्रवाई की गई। इस दौरान रवि (31) पुत्र अशोक कुमार निवासी नवोदयनगर कॉलोनी रोशनाबाद, मूल निवासी नवल सुरजपुर थाना किठोड, मेरठ, राजन चौधरी (35) पुत्र ओम प्रकाश निवासी प्रेमपुरी मोटामहादेव नजीबाबाद रोड थाना नजीबाबाद, मूल निवासी कृपाल आश्रम शिवालिकनगर थाना सिडकुल हरिद्वार और विनीत राणा (25) पुत्र धीर सिंह निवासी मथाना दाबकी कला थाना खानपुर हरिद्वार को गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में सामने आया कि आरोपी लोगों को झांसे में लेकर उनके नाम पर फर्जी कंपनी या फर्म तैयार करते थे। इसके बाद उन्हीं के नाम पर बैंकों में कॉर्पोरेट या करंट खाते खुलवाए जाते थे। इन खातों से जुड़ी पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड रोडवेज बसों या अन्य माध्यमों से दिल्ली में बैठे साइबर ठगों तक पहुंचाए जाते थे।

पुलिस ने आरोपियों के पास से एक कार, पांच मोबाइल फोन, 10 डेबिट कार्ड, तीन पासबुक, तीन चेकबुक, पांच पैन कार्ड, तीन आधार कार्ड और विभिन्न फर्मों की पांच फर्जी मुहरें बरामद की हैं।

आरोपियों के खिलाफ साइबर थाना देहरादून में विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

म्यूल एकाउंट कहलाते हैं ऐसे खाते-  साइबर अपराधों में उपयोग किए जाने वाले तथाकथित “म्यूल अकाउंट” को लेकर पुलिस ने लोगों को सतर्क किया है। एएसपी कुश मिश्रा ने बताया कि ऐसे बैंक खाते, जो गरीब या अनजान लोगों को लालच देकर उनके नाम पर खोले जाते हैं और बाद में साइबर ठगों को बेच दिए जाते हैं, म्यूल अकाउंट कहलाते हैं।

उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम जमा कराने के लिए करते हैं। कई मामलों में वास्तविक खाताधारक को इस बात की जानकारी तक नहीं होती कि उसके खाते से लाखों रुपये के लेनदेन हो रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, जब साइबर ठगी की जांच शुरू होती है तो असली अपराधी पकड़ से दूर रहते हैं, जबकि खाताधारक ही जांच के घेरे में आ जाता है। ऐसे में निर्दोष लोग भी कानूनी परेशानियों में फंस जाते हैं।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता, कंपनी या फर्म खोलने से पहले पूरी जानकारी लें और अपने दस्तावेज किसी भी अनजान व्यक्ति को न सौंपें, ताकि इस तरह के साइबर अपराधों से बचा जा सके।