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डेकोरम जरूरी..कुर्ता-पायजामा पहनकर बहस नहीं कर सकते

नई दिल्ली (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के लिए गर्मियों में ड्रेस कोड में छूट देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है और याचिकाकर्ता को फटकार लगाई। कोर्ट का मानना है कि अदालत में एक निश्चित शिष्टाचार बना रहना चाहिए और वकीलों को उचित पोशाक में ही अदालत में पेश होना चाहिए।
याचिकाकर्ता का कहना था कि गर्मियों के मौसम में काले रंग के कोट और गाउन पहनना काफी असहज होता है और वे अन्य रंगों के कपड़े पहनना चाहते हैं। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम की स्थिति अलग-अलग होती है और ऐसे में इस मामले पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) और केंद्र सरकार को निर्णय लेना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के लिए एक निश्चित शिष्टाचार जरूरी है और वकीलों को उचित कपड़ों में ही अदालत में पेश होना चाहिए। आप कुर्ता-पायजामा या शॉर्ट्स और टी शर्ट पहनकर बहस नहीं कर सकते। कोर्ट का मानना है कि देश में मौसम की स्थिति अलग-अलग होने के कारण इस मामले पर बीसीआई और केंद्र सरकार को निर्णय लेना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि गाउन पहनने की छूट पहले ही दी जा चुकी है, लेकिन वकीलों को कुछ न कुछ तो पहनना ही होगा।
याचिकाकर्ता का कहना था कि काले रंग के कोट और गाउन औपनिवेशिक काल की विरासत हैं और भारतीय मौसम के अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कपड़े पहनना काफी महंगा भी होता है। यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे पर सुनवाई हुई हो। इससे पहले भी इसी तरह की याचिका दायर की गई थी और तब भी कोर्ट ने बीसीआई के पास जाने के लिए कहा था।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दर्शाता है कि कोर्ट अदालत में शिष्टाचार को बनाए रखना चाहता है। हालांकि, कई वकीलों का मानना है कि गर्मियों के मौसम में काले रंग के कोट और गाउन पहनना काफी असहज होता है और उन्हें इस मामले में कुछ राहत मिलनी चाहिए।