अल्मोड़ा। उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड, जनपद अल्मोड़ा ने शिक्षा विभाग में वार्षिक स्थानांतरण प्रक्रिया लागू न होने पर गहरा असंतोष जताया है। संगठन के अध्यक्ष मनोज कुमार जोशी और सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक ने जारी बयान में कहा कि अन्य विभागों में वार्षिक स्थानांतरण नीति के तहत समय पर स्थानांतरण किए गए, लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा ऐसा न किए जाने से शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच असहज स्थिति उत्पन्न हो गई है। संगठन का कहना है कि अप्रैल 2025 में सुगम–दुर्गम से जुड़ी याचिका दायर होने के बाद भी फरवरी 2026 तक लगभग दस माह बीत जाने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जो शासन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कदम बताया। बयान में कहा गया कि जब सुगम–दुर्गम के आधार पर पदोन्नति, धारा 27 और पारस्परिक स्थानांतरण जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं, तो केवल वार्षिक स्थानांतरण को रोका जाना अलोकतांत्रिक है। संगठन ने यह भी कहा कि शासन स्तर पर स्थानांतरण प्रक्रियाएं लगातार चल रही हैं, ऐसे में शिक्षा विभाग में देरी समझ से परे है। संगठन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग में भी वार्षिक स्थानांतरण नीति के तहत तत्काल निर्णय लिया जाए। इस मांग का समर्थन संरक्षक मंडल सदस्य पी एस बोरा, गोकुल मेहता, रमेश पांडेय और महेंद्र गुसाईं के साथ वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिगंबर फुलोरिया, उपाध्यक्ष महेश आर्य, कार्यालय सचिव गणेश भंडारी, दीपक तिवारी, संगठन मंत्री डी के जोशी, संयुक्त मंत्री राजेन्द्र सिंह लटवाल और तारा सिंह बिष्ट, ऑडिटर भगवत सिंह सतवाल तथा कोषाध्यक्ष दीपशिखा मेलकन्या ने भी किया।
शिक्षा विभाग में वार्षिक स्थानांतरण प्रक्रिया लागू नहीं करने को बताया अलोकतांत्रिक


