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उलोवा ने जनकवि गिर्दा को याद किया

अल्मोड़ा। उत्तराखंड लोक वाहनी ने गोष्ठी आयोजित कर जनकवि गिरीश तिवारी गिर्दा की 10 वीं पुण्य तिथि पर उन्हें याद कर श्रद्वासुमन अर्पित किए। शुभारंभ गिर्दा के जनगीतों से हुआ। इस मौके पर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि जनकवि गिरीश तिवारी गिर्दा जन आंदोलन की आत्मा रहे। वो आम कलाकारों से अलग रहे। उनके जन गीत आम जनमानस की आवाज बने। वक्ताओं ने कहा कि गिर्दा वाहिनी के हर आंदोलनों में सक्रिय रहे चाहे वह 1977 का वन बचाओ आंदोलन हो ,1984 का नशा नहीं रोजगार दो आंदोलन या फिर उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन। संचालन रेवती बिष्ट और दया कृष्ण कांडपाल ने किया। जबकि मुख्य वक्ता डाक्टर कपिलेश भोज ने गिर्दा के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस मौके पर लोगों ने गिर्दा के कई जन गीत गाए। जिसमें उत्तराखंड मेरी मातृभूमि, हम लड़ते राया दाजू हम लड़ते रूलो, उत्तराखंड मेरी मातृभूमि आदि गीत गाए गए। यहां वरिष्ठ उपाध्यक्ष जंग बहादुर थापा, अजय मेहता ,कुंदन सिंह, कुणाल तिवारी ,शमशेर गुरंग आदि ने संबोधित किया। जबकि बैठक में जय मित्र बिष्ट, गोकुल शाही, सूरज टम्टा ,शंभू राणा, आदित्य शाह, देवेंद्र वर्मा, नवीन पाठक आदि मौजूद रहे। अंत में सुमगढ़ में 18 अगस्त 2010 में प्राकृतिक आपदा में मारे गए 18 बच्चों को श्रद्धांजलि दी गई।

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