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अदालत ने डिजिटल अरेस्ट के आरोपी की जमानत याचिका खारिज की

अल्मोड़ा। साइबर ठगी के एक गंभीर मामले में सत्र न्यायाधीश श्रीकांत पाण्डेय की अदालत ने आरोपी निशित मांडलिया निवासी जामनगर, गुजरात की जमानत याचिका खारिज कर दी। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता पूरन सिंह कैड़ा ने जोरदार विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने अन्य साथियों के साथ मिलकर एक व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर जान से मारने की धमकी दी और उसके साथ 7.20 लाख रुपये की ठगी की। मामले के अनुसार 11 जनवरी 2025 को पीड़ित को एक फर्जी व्हाट्सएप कॉल आई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। उसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने सीबीआई अधिकारी बनकर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी और उसे 30 घंटे तक वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। डर के चलते पीड़ित ने 13 से 16 जनवरी के बीच अलग-अलग खातों में कुल 7.20 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जांच में सामने आया कि उक्त राशि आरोपी निशित मांडलिया के निर्देश पर उसके सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कराई गई। पुलिस ने आरोपी के मोबाइल से ठगी में प्रयुक्त नंबरों और चैटिंग के साक्ष्य भी बरामद किए हैं। अदालत ने अपराध की गंभीरता, ठगी की योजना, डिजिटल माध्यम से धमकी और आरोपी की भूमिका को ध्यान में रखते हुए उसकी जमानत अर्जी निरस्त कर दी।