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युवा भी आ रहे ब्रेन ट्यूमर की चपेट में

देहरादून। लगातार सिरदर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाकर जांच कराएं, यह ब्रेन ट्यूमर हो सकता है। ब्रेन ट्यूमर बुजुर्गों ही नहीं युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है।
मंगलवार को मैक्स अस्पताल के निदेशक न्यूरोसर्जरी डा. (ब्रिगेडियर) एचसी पाठक ने कहा कि लगातार सिरदर्द सहित अन्य लक्षणों की शुरुआती पहचान फायदेमंद हो सकती है। इससे इलाज और रिकवरी बेहतर होती है। विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस के उपलक्ष्य में पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि शरीर के सभी महत्वपूर्ण कार्य जैसे खाना, बोलना, चलना आदि और हमारी भावनाएं मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिकाओं से नियंत्रित होती हैं। जो जुड़ी होती हैं। सिर के अंदर ऊतकों की असामान्य वृद्धि से ट्यूमर का निर्माण होता है, जो सामान्य ऊतकों को नष्ट करने और उनपर दवाब का कारण बनता है। प्रिंसिपल कंसल्टेंट न्यूरोसर्जरी डा एएम ठाकुर ने कहा कि ट्यूमर घातक या गैर-घातक हो सकते हैं। घातक ट्यूमर ज्यादातर ब्रेन मैटर से उत्पन्न होते हैं और इसे केवल परिवर्तनशील अवधि के लिए नियंत्रित किया जा सकता है। जिसे उपचार के विभिन्न तरीकों (सर्जरी के बाद रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी) से नियंत्रित किया जा सकता है। गैर घातक ट्यूमर ज्यादातर मस्तिष्क के आसपास की संरचनाओं से उत्पन्न होते हैं। यूनिट हेड डा संदीप तंवर ने कहा कि ब्रेन ट्यूमर का अक्सर जागते समय ऑपरेशन किया जाता है। ताकि सर्जन को यह पता रहे कि मरीज के अन्य काम कर रहे हैं।